सासु (माँ)…

हर माँ में एक सास छुपी रहती है, जिससे सिर्फ उसकी बहु दुखी रहती है,

किसी और को ये रूप नहीं दिखता, टी बी सीरियल का मसाला जिससे है हर रोज बिकता,

सास तब तक माँ नहीं बन पाती, जब तक उसको बहु में बेटी नजर नहीं आती,

बेटी के लिए जो अंगारो पर भी चल जाती है, बहु को सिर्फ सोता देख न जाने क्यों जल जाती है?

जबकि बेटी उनकी परवरिश में सीखी होती है , फिर बहु के कपड़ो पर घर की साख क्यों टिकी होतीहै ?

बेटी तो अब अपने घर में नहीं पराई होती है, पर बहु फिर भी दुसरे घर की ही आयी होती है,

बेटी की सौ गलतियां छुपाती है, फिर बहु के सही को भी गलत क्यों बताती है?

बेटे पर माँ अपना हक़ रोज जताती है, इस चक्कर में बहु की सासु माँ बन कर रह जाती है,

बहु को अपने मापदंडो पर तोलती है, हमारे यहाँ ऐसे होता है, बार बार यही बोलती है,

एक होड़ सी लगाती है और अकेले ही दौड़ती है, जो खेल भी नहीं रही उसका बस दिल तोड़ती है,

बहु सीधी हो तो चुप चाप रम जाती है, सासु माँ के हिसाब से अपना भी घर चलाती है,

पर अगर बहु समर्थ हो तो चालाक कहलाती है, सारी रिस्तेदारी में सक़ की निगाह से देखी जाती है,

उसकी एक गलती की ताक में जमाना रहता है, उसका तरीका गलत था ये सबको बताना रहता है,

आपने हिसाब से फिर भी हर काम करती जाती है, और सासु माँ को माँ भी यही बना पाती है,

बहु, बेटे की बीवी होती है, माँ नहीं, पति को पालने की इसको कोई चाह नहीं,

बेटे को पाल के आपने व्यस्क कर दिया है, आपने खाने और कपड़ो का ध्यान रखने के लायक कर दिया है,

जो दर्जा माँ का है वो माँ का ही रहना है, इसमें होड़ लगाके कष्ट क्यों सहना है,

आपके यहाँ जैसे जो होता है, वो भी ठीक है, पर हर वही काम अलग तरीके से भी सटीक है,

छोटी छोटी बात के लिए रिश्ते भिगाडना कहाँ सही होगा, चाय कब बनेगी, फ्रिज में कितना दूध कितना दही होगा,

बहु को सिर्फ स्नेह, सास को सिर्फ आदर की चाह हो, अहम् को किनारे करें तब घर में खुशियों की राह हो,

***************************

don’t judge, just comment 🙂

Stay happy and stay healthy !

7 thoughts on “सासु (माँ)…

  1. Kadva hai lekin sach hai. Baat sirf saas bahu ki bhi nahi, insaniyat ki bhi hai. Dono ko hi apni mamta, sneh aur pyar ko marne nahi dena chahiye vrna riste bemaani aur ghar veeran ho jate hai.

    Liked by 1 person

      1. Correct! It’s not like that we have suffered a lot so that you must go to the same sufferings. It’s better to change the situations according to the generations so that the next generation can also feel relief to some extent.

        Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s