राखी पर यादें…

बचपन में साथ ही पढ़ते थे, साथ ही खेला करते थे,

फिर करके हाथापाई , माता की मार भी झेला करते थे,

तुम भाई भी थे और मित्र भी थे,

हर नये साल के मानचित्र भी थे,

एक होड़ तुम्ही से रहती थी, तुमसे बेहतर बन जाने की,

तुम आगे आगे चले सदा, मेरे लिए राह बनाते आने की,

तुमने रक्षा करी नहीं कभी, मुझे समर्थ बनाया बस,

अपनी जंग आप ही जीतो, इतना समझाया बस,

स्कूल से कॉलेज तक की पढ़ाई, तुमसे सीखी कर कर लड़ाई,

घर का छूटना मेहसूस नहीं था, क्यूंकि कॉलेज में थे तुम भाई,

लगी नौकरी साथ छूटा, राह अलग हो गयी थी तब,

तुम गए अलग सहर को थे, में गयी अलग सहर थी जब,

वो प्यार रहा, वो नेह रहा , रोजाना फ़ोन पर बात रहीं ,

ऑफिस ऐसा मौसम वैसा, घर जाने की योजना कहीं ,

राखी पर मिल ही जाता था , मौका रसम निभाने का,

हक़ से अपना उपहार मिले , और खर्चा घूमने घुमाने का,

बदले तुम थोड़े जब , शादी का शुभ मुहूर्त आया,

अपने जीवन में नये रिश्तों को तुमने धीरे से अपनाया,

तुम ब्यस्त हुए फिर और भी ग्रास्थी की जिम्मेदारी में,

आपस में संकोच बढ़ा, दिन भर की मारा मारी में,

तुमसे ज्यादा बातें अब तो भाभी से हो जाती हैं,

तुम काम या आलस करते हो, बातें पीछे रह जाती हैं,

समय गया, सहर बदले, फिर सहज हम भी हो गए,

अपने जीवन के रिश्तों में, हम भी थोड़ा सा खो गए,

राखी अब भी मन जाती है, लिफाफे में हो या हाथ में,

भाई पर क्या हम अब वो मित्र नहीं जो कभी रहते थे साथ में?

*************************************

Dedicated to my big brother.

“Love you bhai.. but had to say 🙄”

Thanks for reading….!!

Happy Rakshabandhan to all !!!!

6 thoughts on “राखी पर यादें…

  1. आजादी + रक्षाबंधन की शुभकामना ..
    🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
    👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍

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