वायरस का भय #COVID-19

जीवन अस्थिर, है असमंजस हर ओर,

वायरस का भय और गणनाओं का शोर,

करोना का होना, ना होना, बड़ा सवाल है,

होने की शंका होना उससे भी बड़ा बबाल है,

कुछ घर में बंधक, कुछ अनजान जगहों में,

भयभीत स्वप्न और शंकाएँ निगाहों में,

घर के काम और घर से काम की कोशिश जारी,

क्या कुछ सीखाके जाएगी ये महामारी,

आपनो के साथ कहीं सब मिल समय गुजारते हैं,

विदेशी धरती पर फसे कहीं अपने देश को पुकारते हैं,

सरकारें नित नये प्रतिबन्ध जारी करती जाती हैं,

नागरिकों से भी जिम्मेदारी की उम्मीद लगाती हैं,

उपचार से बेहतर बचाव, आज का सूत्र है यही ,

स्वास्थ्य के आगे समय या धन का भी कुछ मोल नहीं,

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More strength to all home and abroad.

Everyone take care of yourself

Hope all will be fine soon enough

Thanks for reading…!!

धेय जीवन के .. !!

कुछ धेय चुने थे जीवन के,

कुछ हिस्से थे मेरे मन के,

करना क्या था और कैसे था,

ये सब निर्धारित जैसे था,

पर नियति पर जोर न चल पाया,

मेरे मन जैसा न कल आया,

कोशिश फिर भी जारी रहती,

एक आशा अब भी प्यारी रहती,

अनजान मार्ग आते सम्मुख,

कुछ खुशियाँ और कुछ लाते दुःख,

रुक जाना कोइ उपचार नहीं,

मन कुंठित है लाचार नहीं,

बस हर रोज बढ़े आगे,

मन चाहे हर दिन न लागे,

बदले हैं मार्ग पर धेय नहीं,

झूठी उपलब्धियों से नेह नहीं,

पाकर जिनको मन भारी है,

और निभाने की लाचारी है,

ये बोझ उठाकर बांहों में,

चलते अंजानी राहों में,

विश्वास ह्रदय में बांधेंगे,

एक दिन धेय को साधेंगे !

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Thanks for reading.. !!

Stay happy keep reading .. !!

नव वर्ष हर वर्ष

नव वर्ष हर वर्ष,

वही उमंग वही हर्ष,

बीते वर्ष का अवलोकन,

और नववर्ष उदेश्यों का अंकन,

सर्द ऋतू से पीड़ित तन,

और सूर्यदेव के दुलभ दर्शन,

फिर भी करके सब बाधा पार,

लेकर अवकाश, सपरिवार,

मानते नववर्ष का त्योहार,

नववर्ष मुबारक हर बार.. !!

©sarikatripathi

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Thanks for reading.. !!

Happy New Year 2020 to all …!!

Stay happy stay blessed ..!!

Photo credit : Internet

यादें कुछ भूली भूली सी..

हो रहा सही , सो रहा अभी,
जो कहा नहीं, सो रहा नहीं,
है वो जगह कहाँ , जाना जहाँ,
वो था कब, जब में भी था वहाँ,
आँखों में स्वप्न अधूरे हैं,
कहने को शब्द न पूरे हैं ,
यादें कुछ भूली भूली सी,
बातें कुछ हैं गोधूलि सी,
कुछ खींच रहा मेरे भीतर,
किस तरह में वहाँ जाऊ पर?
मन को अपने समझाता हूँ,
फिर भी क्यों उधर ही जाता हूँ,
जीवन में आगे बढ़ने को,
किसी और की जंग को लड़ने को,
छोड़ा मैंने जो घर था अपना,
अब लगता है भूला सा सपना,
जो याद बहुत तो आता है,
पर अब उससे कोई न नाता है,
जीवन की राहो में आगे,
एक अंधी दौड़ में थे भागे,
अब जब, सब कर, घर ही बसाना था,
तो फिर छोड़ा ही क्यों वो आसियाना था ?
हो कोई अगर तेरे घर पर,
दे ध्यान अभी इस अवसर पर,
यादें वो न भूली भूली हों,
सूनी न सब गोधूलि हों,
इस कारण जाते रहना है,
घर अपने आते रहना है,

©sarikatripathi
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Thanks for reading.. !!

ये कैसे हिन्दोस्तानी

ये कैसे हिन्दोस्तानी हैं, जो हिन्दोस्तान को जाला रहे,

न सुनते कुछ न ही समझते हैं , वस यूँही चिल्ला रहे,

पत्थर को हाथो में लेकर, शांतिपूर्ण विरोध में आते हैं ,

इनका धेय कुछ और ही है, धेयहीन को भड़काते हैं,

चाहिए इनको रक्षा भी, और रक्षक पर पत्थर फेंक रहे,

इनके पीछे से घड़ियाल कई , अपनी रोटियां सेंक रहे,

अज्ञान में भरकर असंतोष, विरोध में हिंसा लाते हैं,

उनका न देश न धर्म कोई, जो हिंसा को सुलगाते हैं,

रक्त गिरा देश का, देश की ही सम्पति की हानि है ,

हिंसक विरोध करने वाले, ये कैसे हिन्दोस्तानी हैं?

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From the heart of an affected Indian.

#peace

Thanks for reading… !!

कृतिम जीवन #digitallife

कृतिम व्यस्तता से जीवन के खालीपन को भर रहे,

जीवन की दौड़ के नाम पर जीवन को नष्ट कर रहे,

शरीर बाहर से पुष्ट हैं और मस्तिष्क रोगी हो रहे,

देखने में प्रसन्नचित्त और अंदर ही अंदर रो रहे,

कृतिम जीवन के प्रचलन से, मानव यथार्थ से दूर है,

निरर्थक आस्तित्व है पर खुशियों का प्रचार भरपूर है,

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Enjoy life in real world..

Happy Reading …

Stay healthy ..!!

प्रभात चाल.. (morning walk)

सेहत ने साथ देने की सर्त रख दी,
डाइट के ऊपर कसरत की पर्त रख दी,
शुरुआत के लिए प्रभात चाल को आजमाया
और जूतों पर पार्क की गर्त रख दी,

चलने से अधिक जागने का पराक्रम,
और दिनचर्या में सजाने का उपक्रम,
शुरुआत कर लेने से ज्यादा मुश्किल,
बनाये रखना रोज का यह क्रम,

सुन्दर नज़ारे, सुहावन मौसम,
प्रभात के कई रूप अनुपम,
सूरज की पहली किरणों की गर्माहट,
आती पेड़ो से छन छन,

एक घंटे का निवेश सुबह में,
सारे दिन को करे ऊर्जित,
खुशी रहे मन में बस यूँही,
जैसे कुछ कर लिया हो अर्जित,

पर आलस भी हार नहीं माने,
रोज ही लाता नये बहाने,
ठंड कभी तो नींद कभी,
कभी बस यूँही मन भरमाने,

पर सेहत की भी जिद है,
बिना परिश्रम हाथ न देगी,
प्रभात चाल की यह प्रक्रिया,
बंद करी तो साथ न देगी.

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Happy Walking

Stay healthy, stay happy.. !!

चिंता से मेरी लड़ाई है … #stress

हैं कष्ट सभी के जीवन में,

पर सच से बहुत बड़ी है चिंता,

संभल को दो शब्द भी मुश्किल,

सौ किस्से लिए खड़ी है चिंता,

हो गृह जीवन या कर्मक्षेत्र ,

हर ओर ही चिंता छाई है,

अपने खुश जीवन की खातिर,

अब चिंता से मेरी लड़ाई है,

मन है, मेरा मनोबल है ,

जीवन की इच्छा सारी है,

कमजोर कर रही भीतर से,

ये चिंता सब पर भारी है,

है बुद्धि और ज्ञान भी है,

ये मेरे तीर कमान भी हैं ,

पर बंधक है भाबुक मन,

और चिंता से संग्राम भी है,

मेरे विरुद्ध चलती है रण में,

है सोच मेरी चिंता के दल में,

थका रही मस्तिष्क को मेरे,

डुबा डुबा चिंता के जल में,

ग्रहयुद्ध सा चलता है अंदर,

मन नहीं मस्तिष्क के वस में,

सही गलत का भेद हो रहा,

धुंधला अब इस असमंजस में,

ले बचा कोई मुझको मुझसे,

दे दिखा मार्ग सुख शांति का,

साधन हो योग शास्त्र जैसा,

करे नष्ट अंधेरा भ्रान्ति का,

हो उपाय समस्या के अनुसार ही,

अनावश्यक चिंतन कम करना है,

सरल जीवन में सुख लाने को,

चिंता का दमन करना है,

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More strength to all the stressed.. 🤝

De-stress and stay healthy… !!!

Thanks for reading.

खुशियों के टुकड़े..🥳

टुकड़ो में मिलती खुशियाँ, ध्यान ना दो तोनहीं दिखतीं,

टुकड़े यही जोड़ लेते तो खुशियों की चादर बिछतीं,

छोटे छोटे गमों को जोड़ के उदासी तो बना लेते हैं,

छोटी छोटी खुशियों से फिर क्यों ना नई हसीं खिलतीं,

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Thanks for reading..!

Keep happy, Keep smiling.. !!