पृथक पथ..👣

जो भेड़चाल में चल गए, वो काफी आगे निकल गए,

जो पृथक पथ थे गढ़ रहे, वो धीरे धीरे बढ़ रहे,

न धन है ना धन्यवाद ही है, अलग राह के अलग स्वाद ही हैं ,

मंजिल मिली तो आकाशीय होगी, अन्यथा सिर्फ हसीं होगी,

******************************

Thanks for reading.. !!

Stay inspired, stay focused .. !!

मजबूरी सा रोजगार.. 🤔

मन के मुताबिक काम नहीं है, काबलियत भर दाम नहीं है,

सारा दिन दफ़्तर में करें चाकरी, घर में भी आराम नहीं है,

किराया भरना, बिल देने हैं, खर्चो पर कोई विराम नहीं है,

चलती चक्की हर महीने , रुक जाने का कोई नाम नहीं है,

दफ़्तर में रोज जंग नई सी, बिन काम की कुस्ती होती है,

बातों के महल ही बनतें है, बातों से तुस्टी होती है,

ऑफिस में राजनीती करने वालों की ही तो मस्ती होती है,

कामगार सब पिसते हैं, जिनकी तनख्वाह भी सस्ती होती है,

रोज ढूंढ़ते नई नौकरी, जो भविष्य संभाल दे अपना,

काम सही हो तो पूरा हो ,पीछे छूट गया जो सपना,

रोजगार है पर मज़बूरी सा, हाथ भरे हैं मन भारी सा,

चाहत थी दुनिया बदलेंगे, काम मिला है लाचारी सा,

स्वरोजगार का सोचा तो पर साहस जुटा नहीं पाए,

साल माहिनो के खर्चो से, पीछा छूटा नहीं पाए,

मन मरता है, पर डरता है, मन को मना नहीं पाए,

बिन साहस, नहीं मिलेगी राहत, इतना सुना नहीं पाए,

एे काश सभी को मिल जाता, वो रोजगार जो मन भाता,

कर्जे किस्तें भी चुक जाती, और कुछ आगे को बच जाता,

दुनिया भी बदल खूब देते , सब सही जगह तक जा पाते,

नाम ना चाहे होता पर, खुश रोजगार से रह पाते !!

****************************

Dedicated to all who are stuck in less then rewarding jobs, but can’t get out due to financial obligations.

Thanks for reading.

Stay happy stay healthy.. !!!

सासु (माँ)…

हर माँ में एक सास छुपी रहती है, जिससे सिर्फ उसकी बहु दुखी रहती है,

किसी और को ये रूप नहीं दिखता, टी बी सीरियल का मसाला जिससे है हर रोज बिकता,

सास तब तक माँ नहीं बन पाती, जब तक उसको बहु में बेटी नजर नहीं आती,

बेटी के लिए जो अंगारो पर भी चल जाती है, बहु को सिर्फ सोता देख न जाने क्यों जल जाती है?

जबकि बेटी उनकी परवरिश में सीखी होती है , फिर बहु के कपड़ो पर घर की साख क्यों टिकी होतीहै ?

बेटी तो अब अपने घर में नहीं पराई होती है, पर बहु फिर भी दुसरे घर की ही आयी होती है,

बेटी की सौ गलतियां छुपाती है, फिर बहु के सही को भी गलत क्यों बताती है?

बेटे पर माँ अपना हक़ रोज जताती है, इस चक्कर में बहु की सासु माँ बन कर रह जाती है,

बहु को अपने मापदंडो पर तोलती है, हमारे यहाँ ऐसे होता है, बार बार यही बोलती है,

एक होड़ सी लगाती है और अकेले ही दौड़ती है, जो खेल भी नहीं रही उसका बस दिल तोड़ती है,

बहु सीधी हो तो चुप चाप रम जाती है, सासु माँ के हिसाब से अपना भी घर चलाती है,

पर अगर बहु समर्थ हो तो चालाक कहलाती है, सारी रिस्तेदारी में सक़ की निगाह से देखी जाती है,

उसकी एक गलती की ताक में जमाना रहता है, उसका तरीका गलत था ये सबको बताना रहता है,

आपने हिसाब से फिर भी हर काम करती जाती है, और सासु माँ को माँ भी यही बना पाती है,

बहु, बेटे की बीवी होती है, माँ नहीं, पति को पालने की इसको कोई चाह नहीं,

बेटे को पाल के आपने व्यस्क कर दिया है, आपने खाने और कपड़ो का ध्यान रखने के लायक कर दिया है,

जो दर्जा माँ का है वो माँ का ही रहना है, इसमें होड़ लगाके कष्ट क्यों सहना है,

आपके यहाँ जैसे जो होता है, वो भी ठीक है, पर हर वही काम अलग तरीके से भी सटीक है,

छोटी छोटी बात के लिए रिश्ते भिगाडना कहाँ सही होगा, चाय कब बनेगी, फ्रिज में कितना दूध कितना दही होगा,

बहु को सिर्फ स्नेह, सास को सिर्फ आदर की चाह हो, अहम् को किनारे करें तब घर में खुशियों की राह हो,

***************************

don’t judge, just comment 🙂

Stay happy and stay healthy !

पर मैं भागना न चाहूँ ..

जिंदगी रोज दौड़ती है मुझे, पर मैं भागना न चाहूँ ,

घड़ी रोज जगाती है मुझे, पर मैं जागना न चाहूँ ,

हैं सुई की नोक पर टंगी खुशियाँ,पर मैं टांगना न चाहूँ ,

भगवान को कर सकूँ याद, पर मैं मांगना न चाहूँ ,

चाहंते किसीकी होती पूरी कहाँ, मैं जो भी चाहूँ,

करना पड़ता हर दिन वही यहाँ, मैं चाहूँ न चाहूँ,

आलस नहीं, थकान भी है, चाहत है, अरमान भी है,

हो जाये सब काम सभी का,पर मैं करूँ वही जो मैं चाहूँ,

जीवन में जटिलता कम हो, सरलता ही सार बने,

खुशी और प्यार आसानी से मिल जाये , मैं तो बस इतना चाहूँ,

सेहत आप सुधर जाएगी, इच्छाएं गर बस में हो,

संयम और संतोष रहे मन में, मैं तो बस ऐसा मन चाहूँ,

चाँद न चाहे मेरा हो, बस कहीं भी नहीं अंधेरा हो,

जो खुशियों को खरीद सके, जीवन में बस वो धन चाहूँ.

**************************

Thanks for reading

Stay happy, stay healthy.

काश मैं कविता होती.. 📖🎼

काश मैं कविता होती,
सबके मन में रहती, सबके मन का कहती !
 

काश मैं ज्योति होती,
सबको मार्ग दिखाती, चाहे खुद जलती जाती !
 

काश मैं आशा होती,
सबके मन में जाती, सबको हिम्मत दिलाती !
 

काश मैं भाषा होती,
मधुर वचन बन जाती, सबके मन को भाती !
 

काश मैं हवा होती,
बादल के संग बहती, किसी बंधन में ना रहती !
 

काश …

💤 है तो बस आलस ही ..💤

ना चाहत है, ना ही जरुरत है, एक जैसे बने रहने की, ये तो बस आलस है जो की कुछ बदलने नहीं देता,

राह मुश्किल भी नहीं है और दूर जाना भी है, ये तो बस आलस है जो की चलने नहीं देता,

मंजिल कोई पसंद करें तो पूछता हमसे, जरूरत क्या है? ये तो बस आलस है जो की मचलने नहीं देता,

शिकायत करते भगवान से अगर मंदिर तक जाते कभी, ये तो बस आलस है जो की भगवान से भी मिलने नहीं देता,

नाम इसको उम्र का दो या किस्मत ही कह लो, है तो बस आलस ही जो की सम्भलने नहीं देता !!

****************************

Thanks for reading.

Stay happy, stay active !!

आधा सा प्यार 💞

तुम याद हमें कर लेते हो, पर जान नहीं हम पाते हैं, है प्यार तुम्हारा आधा सा, पर मान नहीं हम पाते हैं,

तुम चाताह को उकसाते हो, फिर दूर दूर हो जाते हो, हो प्यार तुम्हारा कितना भी, पर दिखा नहीं तुम पाते हो,

बिन कहे समझ लें हर बात तुम्हारी, ये हो जाये तो अच्छा है, फिर भी सुनने का स्वाद है जो, उसका सुख भी तो सच्चा है,

हैं याद मुझे वो जगड़े सब, जब बात नहीं हम करते हैं , मन में रहती थी चाह छुपी, कुछ कहने सुनने को मरते हैं,

प्यार हो और एक सोच भी हो यह नहीं सदा जरूरी है , अलग मत में एक सामंजस्य बने, बस इतनी मंजूरी है ,

आधा नहीं पूरा प्यार है ये, जो एहसासो में आता है, कहे बिना ही दिल से मिलता है और मन को मेरे भाता है,

***************************************

Thanks for reading !