ये कैसे हिन्दोस्तानी

ये कैसे हिन्दोस्तानी हैं, जो हिन्दोस्तान को जाला रहे,

न सुनते कुछ न ही समझते हैं , वस यूँही चिल्ला रहे,

पत्थर को हाथो में लेकर, शांतिपूर्ण विरोध में आते हैं ,

इनका धेय कुछ और ही है, धेयहीन को भड़काते हैं,

चाहिए इनको रक्षा भी, और रक्षक पर पत्थर फेंक रहे,

इनके पीछे से घड़ियाल कई , अपनी रोटियां सेंक रहे,

अज्ञान में भरकर असंतोष, विरोध में हिंसा लाते हैं,

उनका न देश न धर्म कोई, जो हिंसा को सुलगाते हैं,

रक्त गिरा देश का, देश की ही सम्पति की हानि है ,

हिंसक विरोध करने वाले, ये कैसे हिन्दोस्तानी हैं?

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From the heart of an affected Indian.

#peace

Thanks for reading… !!

खुशियों के टुकड़े..🥳

टुकड़ो में मिलती खुशियाँ, ध्यान ना दो तोनहीं दिखतीं,

टुकड़े यही जोड़ लेते तो खुशियों की चादर बिछतीं,

छोटे छोटे गमों को जोड़ के उदासी तो बना लेते हैं,

छोटी छोटी खुशियों से फिर क्यों ना नई हसीं खिलतीं,

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Thanks for reading..!

Keep happy, Keep smiling.. !!