तकनिकी में आभास.. !! #technology vs #feelings

विडिओ कॉल ने बड़ी मुश्किल में डाल दिया,

जुदाई के गम का सारा अर्थ ही निकाल दिया,

वो सामने तो होते हैं, पर दिल भरता तो नहीं,

रोज मिलने जैसा तो है, पर मिलना तो नहीं,

सुबह की चाय और रात का खाना भी यूँ तो साथ है,

पर दोनों के प्याले और थाली में कुछ अलग सी बात है,

पहले के ज़माने में दिल भर के रो तो थे पाते,

आज झूठी खुशी से जैसे खुद को बस बहलाते,

दो नाव में जैसे साथ बहती हुई शाम सजती है,

पर दूर से झरना देखने से प्यास कब बुझती है?

तकनिकी में सुविधा तो है पर सच्चा आभास नहीं,

तात्कालिक साधन तो है, घर वाला एहसास नहीं,

जीवन के इस रूप को सामान्य नहीं कह सकते,

हमेशा तो विडिओ कॉल के साथ नहीं रह सकते… !!!

©सरिकात्रिपाठी


Thanks for reading my poem..!!

मध्यवर्ग का क्या??

दिल में दर्द हजारों छुपे हुए पर चुप रहता है,

अन्याय समाज और समय के हर दिन सहता है,

उच्च वर्ग की इच्छाओं को श्रम से पूरा करता है,

आवस्यकता पड़े तो गरीब का पेट भी भरता है,

देश की उन्नति की खातिर जो कर अदा करता है,

विपदा कोई आये तो भी सहयोग सदा करता है,

श्रमिक वर्ग की तकलीफों पर राजनीति बहती है,

मध्यवर्ग की विपदाओं पर कोई दृष्टि नहीं रहती है,

उच्चवर्ग के नुकसानों के अनुमान लगाये जाते हैं,

श्रमिकों के उत्थान हेतु भी कानून बनाये जाते हैं,

पर जब किसी आपदा में मध्यवर्ग की नौकरी जाती है,

तो उन उमीदों से निकल क्यों कोई मदद नहीं आती है?

अपने बोझ उठाए खुद पर आप घिसा करता है,

उसका क्या जो दो पाटों के बीच पिसा करता है?

©सरिकात्रिपाठी


Thanks for reading… !!! Also listen to the recitation in the attached clip…!!

Keep strong who ever is facing harsh time..!!

Featured image borrowed from internet with thanks !!

मध्यवर्ग का क्या? कविता पाठ

यमलोक में भ्रष्टाचार !

कुछ नेता यमलोक गए हैँ शायद, सत्ता को हतियाया है,

धर्मराज को देकर अवकाश अपना कुछ जाल बिछाया है,

जैसे यमदूतों को लक्ष्य मिले, संख्या कुछ पूरी करने को,

ले आओ जो कमजोर दिखे, या राजी हो जाये मरने को,

सही गलत या पाप पुण्य सब बेबस सत्ता के आगे हों,

अकाल मृत्यु के जाल बिछे, जैसे सब लोग अभागे हों,

अदृश्य विषाणु के बल पर, बाहर जो सबको ताक रहे,

मानसिक रोगों का भेष बना, घर के अंदर भी झाँक रहे,

यमदूत सड़क पर, पटरी पर, हैं अस्पताल, बाजारों में,

घर में भी आकर बैठ गए, और घूम रहे हैं कारों में,

है मिलीभगत कुछ पृथ्वी से, अपने बदले चुकबाती है,

भूकंप के झटके देती है, चक्रबात कहीं पर लाती है,

है अर्थव्यवस्था धराशाई, और पडोसी लड़ाई करना चाहे,

यह जैसे यमदूतों की चालें हैं, जो गिनती का बढ़ना चाहें,

यमराज तुम्ही हो धर्मराज, अपना राज्य संभालो अब ,

भ्रष्टाचार बहुत हो चुका है, कुछ अंकुश लगालो अब,

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

©सरिकात्रिपाठी

Thanks for reading… !!

जाने किस रास्ते जा रहे हैँ… 👣

आँखों में नींद को भरे, जागते जा रहे हैं,

जिंदगी जीने की आस लिए, भागते जा रहे हैं,

आस नहीं कुछ ख़ास और निराश भी नहीं हैं,

मंजिलों की तालश में जाने किस रास्ते जा रहे हैं,

©सारिकात्रिपाठी

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Thanks for reading … !!

नन्ही जान.. 🌱👶

एक बीज बो दिया और कोपल का इंतजार शुरू हुआ,

मिट्टी में दबे बीज से, उमीदों का बाजार शुरू हुआ,

दो पत्तियों में प्राण से, दरख़्त का आधार शुरू हुआ,

ज़मीन और जल दिया, माली का उपकार शुरू हुआ,

कुछ अधूरे स्वप्न, कुछ अधूरे फ़र्ज,

नन्ही सी जान पर जाने कितने कर्ज,

आशाएं बंध गई, रूप सुन्दर हो, वृक्ष फलदार भी

बड़े होने पर छाया भी दे और पुष्प खुशबूदार भी,

नन्ही जान ने चाहा कुछ और नहीं, बस प्यार ही,

अपेक्षाओं की भीड़ में, ढूंढ़ता माली का दुलार भी,

सूरज जिस ओर रहा, उसने डालें उस ओर फैला दी,

गर्माहट की अपनी चाहत, इस तरह उसने दिखला दी,

यह जाना नहीं की इससे छवि टेड़ी हो सकती उसकी,

माली द्वारा तय दिशा, इस प्रयास में खो सकती उसकी,

माली ने उसकी डाल और जड़ की दिशा सुधारने के लिए,

कुछ काटा कुछ छांटा, अवरोध कर दिशा परिवर्तन किये,

अपनी चाहतों को त्यागकर पोधा, माली के मन सा,

खुद को ढालने लगा उसमे, जो था कर्ज का जीवन सा,

इस प्रकार संरक्षित, वह बड़ा दरख़्त हो जब साकार हुआ,

अपेक्षाओं का वास्तविक्ता से तब साक्षात्कार हुआ,

छाया तो खूब हुई, पर फल नहीं आते थे,

कुछ तो बात थी, फूल बहुत जल्दी मुरझाते थे,

बेमन सा आंगन में खड़ा, सबकी आंखों में ओस बना,

सारा जीवन समर्पित कर भी, वह एक अफ़सोस बना,

माली भी विस्मित था, क्या परवरिश में खोट रही,

इतने सालों मेहनत की, फिर भी अपेक्षाओं पर चोट रही,

अब पेड़ दुखी, परिवार दुखी, क्या करे हाय माली,

शायद कुछ रंग और होते, न टूटी होतीं वो डालीं।

©सारिकात्रिपाठी

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Thanks for reading..!!

Stay open, stay generous.. !!

आजकाल, जागने से भी सवेरा नहीं होता..🌚🌝

सूरज है रौशन पर, दूर अंधेरा नहीं होता,

आजकाल, जागने से भी सवेरा नहीं होता,

मोबइल में अलार्म, टुनटुना कर कई बार रोता है,

की उठो तो सही, इतनी देर तक क्या कोई सोता है,

हर रोज, एक नये दिन का आभास तो होता है,

पर नये दिन में करने को, कुछ खास नहीं होता है,

कई बार पोधों को मिलते हैं, पत्तियों को गिनते हैं,

और खुद से बातें करते हुए, कई ख्याल बुनते हैं ,

यदि सारी योजनाओं को अंत में अपूर्ण ही रहना था,

तो उनके पाने के लिए इतना कष्ट क्यों सहना था,

जैसे की जीवन में अर्थ कुछ कम होने लगे से हैं,

पर इस सब के बीच भी कुछ सपने जगे से हैं,

सवेरे में जब हम अलार्म को आगे बढ़ाते होते हैं,

ऐसा नहीं की हर उम्मीद छोड़ कर बेसुध सोते हैं,

अँधेरे ने घेरा है तो कुछ रौशनी भी ढूंढ़ते रहना,

सूरज ना मिले तो किसी चाँद को अपना कहना,

कुछ उमीदें रोशन रखना अंधेरों में भी,

क्यूंकि यह बादल छटेंगे कभी न कभी,

©सरिकात्रिपाठी

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Thanks for reading..!!

Keep patience..

Stay healthy, stay happy.. !!

माना की चाँद नहीं..

माना की हर कोई चाँद नहीं होता,

पर तारों के बिना भी आसमान नहीं होता,

चाँद को नजदीकी का फायदा मिलता है,

धरती की नजर में वही अधिक खिलता है,

यूँ तो तारों में ही ज्यादा रौशनी होती है,

वस देखने वाले की नजर की कमी होती है,

की उसको चाँद ही बड़ा दिखता है,

और वो चाँद की ही तारीफें लिखता है,

तारों ने कई वीराने हैं रोशन करे हुए

ब्राह्मण में ऊर्जा के हैं श्रोत बन हुए,

सूर्य भी तो ऐसा ही एक तारा है,

जिससे ही धरती का जीवन सारा है,

खुद को जलाता है फिर भी तारीफें कम हैं,

क्यूंकि चाँद की आँखो में ही संसार के सारे गम हैं,

कुछ लोग चाँद होकर सुंदरता की मिसाल हो जाते,

जबकि बहुत से तारे दूसरों के लिए खुद खो जाते,

अपनी नजरों की कमी को दूर करने की है जरूरत

गौर से देखो तो यह तारे ही ज्यादा हैं खूबसूरत।

©सरिकात्रिपाठी

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Thanks for reading…

Stay happy.. stay safe.. !!!

Picture credit : internet

तालाबंदी #lockdown

तन घर में बंधक है तो क्या, मन का पंछी आसमान से खुश हो,

तालाबंदी में सब बाधित है तो क्या, जीवन कम सामान में खुश हो,

घर से काम की सुबिधा पाकर, दफ़्तर का हर लाचार भी खुश हो,

क्या कुछ के बगैर जी सकते हैं, लोभी का मन इस विचार में खुश हो,

घर के कुछ काम खुद करके, हर आलसी अपने पुरषार्थ से खुश हो ,

और बिन काम भी गरीब का बेतन देकर, अपने इस परमार्थ से खुश हो,

खाली गलियों में भूखे पशुओं को, भोजन देकर दान से खुश हो,

घर रहकर परिवार बचाकर, देश को अपने योगदान से खुश हो,

तालाबंदी जब खुल जाएगी , उस नये विश्व के विश्वास से खुश हो,

कुंठित होना बहुत सरल है, आशा भारी हर स्वास से खुश हो,

खुश हो की ईश्वर ने इतना सक्षम किया तुझे, की करे प्रतीक्षा खुले जीवन की,

सबको यह अवसर भी तो नहीं मिला, की रक्षा कर पाते अपने तन की,

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Stay generous, stay humble…

Stay positive, stay home …

Stay healthy, stay safe….

For now just stay … !!!

वायरस का भय #COVID-19

जीवन अस्थिर, है असमंजस हर ओर,

वायरस का भय और गणनाओं का शोर,

करोना का होना, ना होना, बड़ा सवाल है,

होने की शंका होना उससे भी बड़ा बबाल है,

कुछ घर में बंधक, कुछ अनजान जगहों में,

भयभीत स्वप्न और शंकाएँ निगाहों में,

घर के काम और घर से काम की कोशिश जारी,

क्या कुछ सीखाके जाएगी ये महामारी,

आपनो के साथ कहीं सब मिल समय गुजारते हैं,

विदेशी धरती पर फसे कहीं अपने देश को पुकारते हैं,

सरकारें नित नये प्रतिबन्ध जारी करती जाती हैं,

नागरिकों से भी जिम्मेदारी की उम्मीद लगाती हैं,

उपचार से बेहतर बचाव, आज का सूत्र है यही ,

स्वास्थ्य के आगे समय या धन का भी कुछ मोल नहीं,

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More strength to all home and abroad.

Everyone take care of yourself

Hope all will be fine soon enough

Thanks for reading…!!

धेय जीवन के .. !!

कुछ धेय चुने थे जीवन के,

कुछ हिस्से थे मेरे मन के,

करना क्या था और कैसे था,

ये सब निर्धारित जैसे था,

पर नियति पर जोर न चल पाया,

मेरे मन जैसा न कल आया,

कोशिश फिर भी जारी रहती,

एक आशा अब भी प्यारी रहती,

अनजान मार्ग आते सम्मुख,

कुछ खुशियाँ और कुछ लाते दुःख,

रुक जाना कोइ उपचार नहीं,

मन कुंठित है लाचार नहीं,

बस हर रोज बढ़े आगे,

मन चाहे हर दिन न लागे,

बदले हैं मार्ग पर धेय नहीं,

झूठी उपलब्धियों से नेह नहीं,

पाकर जिनको मन भारी है,

और निभाने की लाचारी है,

ये बोझ उठाकर बांहों में,

चलते अंजानी राहों में,

विश्वास ह्रदय में बांधेंगे,

एक दिन धेय को साधेंगे !

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Thanks for reading.. !!

Stay happy keep reading .. !!